हैलो ,
कभी कभी समय की कमी या सही जानकारी न मिलने की वजह से छुटियो को प्लान करने में बड़ी मुश्किल आती है। जल्दी में मैं परिवार के साथ राजस्थान गया अपनी कार से तीन दिन के लिए जो की एक अच्छा ट्रिप रहा, जो आपके साथ शेयर कर रहा हु हो सकता है आपके काम आये। सुबह ६ बजे पहले हम निकले खाटू श्यामजी के लिए जो देल्ही से तक़रीबन 300KM की दुरी पर है। मेहरौली , गुडगाँव , शाहपुरा , रिंग्स इस रास्ते में पड़ते है , याद रहे की आपको अजीतगढ़ मोड से right turn लेना है । रास्ते में नीमराणा जगह को पार करने के बाद खाना खाने के लिए आपको बहुत अच्छे अच्छे रेस्टोरेंट मिलेंगे जहॉ आप बढ़िया नाश्ता कर सकते है। मुझे तो किंग रेस्टोरेंट का खाना A-one लगा। जहाँ बच्चो ने भी खूब मजे किये। फिर हम खाटू श्यामजी के लये रवाना हुए , करीब १२:३० बजे हम वहां पहुंचे। delhi से खाटू तक सड़क बहुत बढ़िया थी ऐसी सड़क पर ड्राइव करके मज़ा आ गया । रहने के लिए खाटू में आपको बहुत सारी अच्छी धर्मशालाए मिलेंगी , होटल्स भी है। पर हमने तो धर्मशाला का मन बना कर , वहाँ रुके और शाम को दर्शन करने निकल गए 'हारे के सहारे' ( खाटू श्याम नरेश ) के। सच मानो दोस्तों भीड़ को देखते हुए ऐसे आसान और सरल दर्शन आपने कही नहीं देखे होंगे , जैसे ही आप मंदिर के अंदर जाते हो दूर से ही श्याम नरेश के दर्शन होने शुरू हो जाते है। बहुत सुखद दर्शन थे वो। दर्शन करने के बाद हमने वही की लोकल मार्किट में खूब एन्जॉय किया , शॉपिंग और बढ़िया खाने पीने के साथ।रात वही गुजार कर हम अगले दिन सालासर बालाजी के लिए तकरीबन १० बजे रवाना हुए जो वहां से 100km के आस पास है ,वहाँ
व्यवस्था तो अच्छी है पर ध्यान रहे जब आप आखिर में मंदिर में जाएँ तो अपने दायें तरफ रहे क्यूंकि बाईं ओर से दर्शन से वंचित रहना पड़ सकता है। सालासर की मार्किट
तो काफी बड़ी है,क्यूंकि हमे आगे झुंझुनू जाना था इसलिए हम वहाँ न रुक कर आगे
निकल गए। सालासर से झुंझुनू , सीकरी होकर जाना पड़ता है। सालासर से झुंझुनू भी 100km के आस पास है। झुंझुनू में ख़ास रानीसती मंदिर ही है जो ख़ास आकर्षण और भक्ति का केंद्र है। बहुत सुन्दर मंदिर है , परिसर के अंदर ही अच्छी रहने की व्यवस्था और अच्छा खाना पीना , यहाँ पर भक्तों को रुकने पर मजबूर कर देता है। यहाँ पर मेरे अनुमान में कम से कम हज़ार कमरे होंगे। सब कमरे अति विशाल और एक समान है
चाहे वो (AC 750/-) या NON AC 250/- रुपये में हो। खाने के लिए दो तरह की व्यवस्था है Buffet (70/- थाली ) और canteen में ( साउथ और नॉर्थ)दोनों , दोनों मंदिर प्रसाशन की निगरानी में है जिसके कारण क्वालिटी मेन्टेन रहती है। यहाँ खाने में प्याज तक का इस्तेमाल नहीं होती है।रात में मंदिर की सुंदरता देखते ही बनती है और सुबह की आरती मिस न करके रानीसती दादी का आशीर्वाद अवश्य लें। फिर हम सुबह का बढ़िया नाश्ता करके दिल्ली की ओर वापिस रवाना हो गए , यहाँ से दिल्ली की वापिस में आपको चिड़ावा , नारनौल ,रेवाड़ी ,धारूहेड़ा , गुडगाँव रस्ते में मिलेंगे , झुंझुनू से दिल्ली तकरीबन 230km पड़ती है। सड़क पूरे रस्ते आपको बहूत बढ़िया मिलेगी , जिससे ड्राइव का मज़ा दुगना हो जाएगा। फ्रेंड्स एक अरसे के बाद मैंने और मेरे परिवार ने छुट्टियों को खूब एन्जॉय किया। उम्मीद करता हू की मेरी दी हुई जानकारी आप के काम आ सके और आपका सफर सुहाना बन सके।अगर आपको मेरा ये पोस्ट पसंद आया हो तो कमेंट या लाइक जरूर दें।
धन्यवाद
